जब किसी के इंतक़ाल की ख़बर मिलती है, तो मुसलमान सबसे पहले जो कलिमात कहते हैं वे हैं: इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन। इस पेज पर आपको इस आयत का पूरा हिंदी अर्थ, अरबी में लिखा टेक्स्ट कॉपी करने की सुविधा, कब पढ़ी जाती है, और पूरी दुआ हिंदी तर्जुमे के साथ मिलेगी।
إِنَّا لِلَّٰهِ وَإِنَّا إِلَيْهِ رَاجِعُونَ
Innā lillāhi wa innā ilayhi rāji'ūn
हिंदी में अर्थ
निश्चय ही हम अल्लाह के लिए हैं और हम उसी की ओर लौटने वाले हैं।
यह सूरह अल-बक़रह की आयत नंबर 156 है। इससे पहले की आयत में अल्लाह तआला ने आज़माइशों का ज़िक्र किया — डर, भूख, और जान-माल का नुक़सान — और फिर सब्र करने वालों की पहचान बताई: वे लोग जो मुसीबत के वक़्त यही कलिमात कहते हैं।
इस आयत का मतलब क्या है?
यह सिर्फ़ अफ़सोस के अल्फ़ाज़ नहीं, बल्कि ईमान का ऐलान है। इसका मतलब यह है कि हर जान अल्लाह की मिल्कियत है। जो हमसे जुदा हुआ वह ख़त्म नहीं हुआ, बल्कि अपने मालिक की तरफ़ लौट गया है, और हम सब भी उसी रास्ते पर हैं। यही सोच दिल को सब्र और सुकून देती है।
यह कलिमात कब पढ़े जाते हैं?
आम तौर पर किसी के इंतक़ाल की ख़बर सुनकर यह कलिमात कहे जाते हैं, लेकिन हदीस से मालूम होता है कि हर मुसीबत और नुक़सान पर — चाहे वह छोटा हो या बड़ा — यह कलिमात कहना सुन्नत है। कोई क़ीमती चीज़ गुम हो जाए, कोई बुरी ख़बर मिले, या कोई तकलीफ़ पहुँचे — इन सब मौक़ों पर इन्ना लिल्लाहि पढ़ना सब्र का इज़हार है जिस पर अज्र मिलता है।
पूरी दुआ हिंदी तर्जुमे के साथ
हज़रत उम्मे सलमा (रज़ि.) से सहीह मुस्लिम में रिवायत है कि नबी करीम ﷺ ने फ़रमाया: जो शख़्स मुसीबत के वक़्त यह दुआ पढ़े, अल्लाह तआला उसे उसकी मुसीबत में अज्र देता है और उसे उससे बेहतर बदला अता फ़रमाता है।
إِنَّا لِلَّٰهِ وَإِنَّا إِلَيْهِ رَاجِعُونَ، اللَّهُمَّ أْجُرْنِي فِي مُصِيبَتِي وَأَخْلِفْ لِي خَيْرًا مِنْهَا
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इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन
इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन। अल्लाह तआला मरहूम की मग़फ़िरत फ़रमाए और जन्नतुल फ़िरदौस में आला मक़ाम अता फ़रमाए। आमीन।
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इसका मतलब है: निश्चय ही हम अल्लाह के लिए हैं और हम उसी की ओर लौटने वाले हैं। यह सूरह अल-बक़रह की आयत 156 है। नहीं, हर मुसीबत और नुक़सान पर यह कलिमात कहना सुन्नत है — इंतक़ाल सबसे बड़ा नुक़सान है इसलिए अक्सर इसी मौक़े पर सुनी जाती है।इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन का मतलब क्या है?
क्या यह सिर्फ़ इंतक़ाल पर पढ़ी जाती है?